Monday, August 16, 2021

814>|| जीवन बने अच्छा ||

        

814>|| जीवन बने अच्छा ||

            <-----आद्यनाथ---->


हर कर्ममें श्रेष्ठ बनकर रहो सदा

मनमे नेही रखना नकारात्मक भाबना।

कोशिश रहे सदा जीवन बने अच्छा,

और श्रेष्ठ गुणों का खजाना।


कर्म कभी ऐसा न करें,

शर्म से आपना मुंह छुपाना पड़े।

मनमे ऐसी भाबना कभी नखे,

सबकोइ आपसमें मुख मोड़ले।


आपना नजर से कभी गिरो नही,

ख्याल रखे, झुके न सिर शर्म से कभी।

अटल सत्य और सदाचार रहो,

चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनाए रखों।

   <--©--➽-ए एन राय चौधुरी-->

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