814>|| जीवन बने अच्छा ||
<-----आद्यनाथ---->
हर कर्ममें श्रेष्ठ बनकर रहो सदा
मनमे नेही रखना नकारात्मक भाबना।
कोशिश रहे सदा जीवन बने अच्छा,
और श्रेष्ठ गुणों का खजाना।
कर्म कभी ऐसा न करें,
शर्म से आपना मुंह छुपाना पड़े।
मनमे ऐसी भाबना कभी नखे,
सबकोइ आपसमें मुख मोड़ले।
आपना नजर से कभी गिरो नही,
ख्याल रखे, झुके न सिर शर्म से कभी।
अटल सत्य और सदाचार रहो,
चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनाए रखों।
<--©--➽-ए एन राय चौधुरी-->
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